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बेल पथ्थर के फायदे और नुक़सान (bel patthar ke fayade aur nuksan)

ऐगल मार्मेलोस एल (Aegle marmelos L.), जिसे आमतौर पर बेल (या बेल पत्थर), गोल्डन एप्पल, स्टोन एप्पल या वुड एप्पल के नाम से भी जाना जाता है, एक पेड़ है जो भारतीय उपमहाद्वीप का मूल निवासी हैं। दुनिया के कुछ हिस्सों में, इस फल को एलीफेंट एप्पल कहा जाता है क्योंकि यह हाथियों द्वारा बहुत पसंद किया जाता है।

यह पेड़ बहुत कठिन परिस्थितियों और ऐसी जगहों पर भी उग सकता है जहाँ अन्य पेड़ों को मुश्किलें होती हैं| उदाहरण के लिए, यह जलभराव और विस्तृत तापमान रेंज (-7 डिग्री सेल्सियस से 48 डिग्री सेल्सियस) तक सहन कर लेता है। यह मिट्टी की एक विस्तृत पीएच रेंज (5-10) में विकसित हो सकता है। हालाँकि, फल देने के लिए इसे खुश्क मौसम की आवश्यकता होती है।

इस पेड़ को हिंदुओं द्वारा पवित्र माना जाता है। इसी कारणवश बेल के पेड़ों को आसानी से हिंदू घरों और मंदिरों के पास देखा जा सकता है। बेल के धार्मिक महत्व के प्रारंभिक प्रमाण ऋग्वेद के श्री शुकतम में दिखाई देते हैं, जो इस पौधे को देवी लक्ष्मी के निवास के रूप में मान्यता देता है, जो धन और समृद्धि की देवी मानता है| हालांकि, समकालीन हिंदू समाज में इसका उपयोग ज्यादातर भगवान शिव की पूजा में किया जाता है, जिन्हें बेल के पेड़, इसके पत्ते और फल का शौकीन माना जाता है।

बेल को कई जैव-रासायनिक पदार्थ जैसे एल्कलॉइड, एंटीऑक्सिडेंट, पॉलीसेकेराइड और आवश्यक तेलों की उपस्थिति के कारण औषधीय मूल्यों के लिए जाना जाता है। बेल फल का आंतरिक हिस्सा कीटनाशक, पोषक और प्रकृति में चिकित्सीय है। इसका उपयोग आम भारतीयों तथा आर्युवेदिक वैद्यों द्वारा कई बीमारियों और विकारों के उपचार के लिए किया जाता रहा है।

Table of Contents (in Hindi)
  • बेल फल के स्वास्थ्य लाभ
  • कुछ सावधानियां: बेल पत्थर के दुष्प्रभाव
  • बेल पत्थर के विकल्प

बेल फल के स्वास्थ्य लाभ (bel pattar fal ke fayade)

वर्तमान में परीक्षणों के अभाव के कारण मनुष्यों पर बेल के स्वास्थ्य प्रभाव का समुचित ज्ञान चिकित्सकों को नहीं है। यद्यपि बेल पत्थर पर कुछ अध्ययन किए गए हैं, पर उनमें से ज्यादातर प्रारंभिक प्रयोगशाला या पशु अध्ययन हैं।

उपलब्ध सीमित अनुसंधान के निष्कर्षों तथा आयुर्वेदिक चिकित्सकों और ऋषियों के ज्ञान के आधार पर बेल फल खाने के कुछ फायदे नीचे सूचीबद्ध किए गए हैं:

पाचन में सहायता करता है और कब्ज से बचाता है

अपने रेचक (दस्तावर) गुणों के कारण कब्ज को ठीक करने के लिए बेल का फल सबसे अच्छी प्राकृतिक औषधियों में से एक है। कब्ज को ठीक करने के लिए इसे शर्बत के रूप में भी लिया जा सकता है। बेल के कच्चे पत्तों को चबाने से कई गैस्ट्रिक समस्याओं को हल करने में मदद मिलती है।

इसके गूदे में थोड़ी सी काली मिर्च और नमक मिलाकर नियमित रूप से सेवन करने से आंतों से विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। इन सब के अलावा ये ऐंटिफंगल और एंटीपैरासिटिक भी है। इसके यह सभी गुण, पाचन स्वास्थ्य को बढ़ाने के लिए बेल पत्थर को एक आदर्श फल बनाते हैं।

गैस्ट्रिक अल्सर को कम करता है

बेल फल में कुछ फेनोलिक यौगिक होते हैं जिनमें एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं जो गैस्ट्रिक अल्सर, विशेष रूप से गैस्ट्रोडोडोडेनल (gastroduodenal) अल्सर से लड़ने में मदद करते हैं। इस प्रकार का अल्सर पेट में अम्लीय स्तर में असंतुलन के कारण होता है। बेल के पेड़ के पत्तों में टैनिन होता है, जो सूजन को कम करने के लिए जाना जाता है।

क्योंकि यह फल पाचन तंत्र को अल्सर से बचाता है, तथा इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) व आंतों की ऐंठन की आवृत्ति को कम करता है, इसलिए यह दस्त, पेचिश जैसे एलीमैंट्री कैनाल (प्राथमिक नहर) के संक्रमणों के इलाज में फायदेमंद है।

दस्त, हैजा, बवासीर, विटिलिगो का इलाज कर सकते हैं

बेल फल में टैनिन की मौजूदगी दस्त और हैजा जैसी बीमारियों को ठीक करने में मदद करती है। अपरिपक्व बेल फल के गूदे के अर्क में जीवाणुरोधी गुण होते हैं जो बैक्टीरिया के संक्रमण से होने वाले दस्त से लड़ने में मदद कर सकते हैं। बेल वृक्षों के तने और शाखाओं में एक गम जैसा पदार्थ होता है जिसे ‘फेरोनिया गम’ कहा जाता है। इसका उपयोग भी आमतौर पर दस्त और पेचिश के इलाज में किया जाता है।

इसके अतिरिक्त अपरिपक्व बेल फल का अर्क प्रभावी ढंग से बवासीर और विटिलिगो का इलाज कर सकता है। सौंफ़ और अदरक के साथ अपरिपक्व फल का काढ़ा बवासीर के मामलों में दिया जाता है।

रोगाणुरोधी गुण

शोधकर्ताओं ने साबित किया है कि बेल फल के अर्क में रोगाणुरोधी गुण होते हैं। इसमें एंटी-वायरल और एंटी-फंगल गुण भी होते हैं जो शरीर में विभिन्न संक्रमणों के इलाज में मदद करते हैं।

स्कर्वी को ठीक कर सकता है

स्कर्वी रोग विटामिन सी (एस्कॉर्बिक एसिड) की कमी के कारण होता है और यह रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करता है। आहार में जोड़े जाने पर, बेल विटामिन का एक समृद्ध स्रोत होने के कारण, इस बीमारी को ठीक करने में सक्षम है। बेल का रस विटामिन सी में समृद्ध है, और स्कर्वी उपचार के लिए अच्छा है। विटामिन सी का यह उच्च स्तर प्रतिरक्षा प्रणाली की ताकत और शक्ति को भी बढ़ाता है, जिससे ऐसे लोगों की रक्षा होती है जो विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मजीवी और वायरल संक्रमणों से प्रभावित है।

कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित कर सकते हैं

बेल के पत्तों के अर्क का उपयोग रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है जो बेल के पत्तों को अत्यधिक चिकित्सीय बनाता है। पके हुए बेल के फलों का रस (ऐगल मार्मेलोस का रस) जब घी में मिलाकर दैनिक आहार में शामिल किया जाता है, तो हृदय रोगों जैसे दिल के दौरों से बचाता है। इसका उपयोग हार्ट टॉनिक के रूप में भी किया जाता है।

सांस की समस्याओं को हल कर सकते हैं

बेल के तेल के अर्क का उपयोग अस्थमा या आवर्ती ठंड जैसे श्वसन संबंधी विकारों को ठीक करने के लिए किया जा सकता है। नहाने से पहले सिर पर लगाने पर, यह तेल ठंड का प्रतिरोध भी प्रदान कर सकता है। पत्तियां कफ को ढीला करने और श्वसन प्रणाली में इसके निर्माण को समाप्त करने में मदद करती हैं। वे गले में खराश का इलाज करने और खांसी का इलाज करने में भी मदद करती हैं।

सूजन तथा जलन घटाता है

सूजन के क्षेत्र पर बेल का अर्क लगाने पर सूजन जल्दी ठीक हो सकती है।

अपरिपक्व बेल फल इन्फ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज (inflammatory bowel disease) के खिलाफ रक्षा प्रदान कर सकता है। 2012 में इंडियन जर्नल ऑफ फार्माकोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन, जोकि चूहों पर किया गया था, से पता चला कि बेल फल का अर्क आंतों की सूजन को कम करने में मदद कर सकता है, जोकि इन्फ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज का एक प्रमुख संकेत है।

बेल की जड़ों को सांप के जहर का टीका माना जाता है क्योंकि यह सर्पदंश से होने वाली सूजन तथा जलन को कम करता है। वास्तव में आयुर्वेदिक उपचार में, सर्पदंश को ठीक करने के लिए बेल फल के पौधे के सभी भागों का उपयोग किया जाता है।

मधुमेह को नियंत्रित कर सकते हैं

यह अग्न्याशय को उत्तेजित करता है जिससे यह पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का उत्पादन करता है, जो रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक है। बेल पत्थर की पत्तियों तथा इसके तने और शाखाओं में स्थित फेरोनिया गम का उपयोग मधुमेह के खिलाफ किया जा सकता है।

रक्त शुद्धीकरण तथा किडनी के लिए लाभकारी

50 मिलीग्राम बेल के फल के रस को गर्म पानी और चीनी के साथ मिश्रित करके सेवन करने से रक्त शोधन होता है और शरीर विषाक्त पदार्थों से मुक्त हो जाता है। इससे यकृत और गुर्दे, जिनका कार्य शरीर को विषाक्त पदार्थों से मुक्त करना है, पर तनाव कम हो जाता है। इसी कारणवश गुर्दे की बीमारी वाले लोगों को बेल पत्थर का नियमित सेवन करने की सलाह दी जाती है।

लिवर स्वास्थ्य की रक्षा करता है

बीटा-कैरोटीन का एक अच्छा स्रोत होने के कारण, बेल पत्थर जिगर की समस्याओं के लिए उपयोगी है। इनमें थायमिन और राइबोफ्लेविन होते हैं, जिन दोनों को ही लिवर स्वास्थ्य बूस्टर के रूप में जाना जाता है।

बुखार के खिलाफ रक्षा करता है

बेल पत्थर के पत्तों का कड़वा, तीखा रस, शहद के साथ मिला कर पीने से बुखार उतर जाता है। थाई-म्यांमार सीमा क्षेत्र में महिलाओं द्वारा बेल के फलों के गूदे को एक कॉस्मेटिक घटक के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। यह क्षेत्र डेंगू और मलेरिया से अक्सर प्रभावित होता है, और अध्ययनों ने सुझाव दिया है कि गर्भवती महिलाओं की त्वचा पर इसके गूदे और रिपेलेंट्स के मिश्रण को लगाने से मलेरिया से बचने में सहायता मिल सकती है। हालांकि मलेरिया से बचाव पर इस मिश्रण के लाभों के पीछे के तंत्र का पता लगाने के लिए अध्ययन चल रहा है।

कुछ सावधानियां: बेल पत्थर के दुष्प्रभाव (Side-effects of bael patthar fal)

मनुष्यों में शोध की कमी के कारण, बेल पत्थर या इससे संबंधित पूरक आहारों का लंबे समय तक या नियमित उपयोग कितना सुरक्षित है, इसके संबंध में बहुत कम जानकारी है। हालांकि, कुछ लोगों का मत है कि बेल फल का अत्यधिक प्रयोग निम्न रक्त शर्करा और पेट खराब करने जैसे साइड इफैक्ट्स को उत्पन्न कर सकता है।

बेल के पत्ते में एजलाइन (aegeline) होता है जो गंभीर यकृत की चोट, यकृत की खराबी तथा उससे होने वाली मृत्यु का संभावित कारक है। प्रारंभिक पशु अध्ययनों से यह ज्ञात हुआ है कि एजलाइन रक्त शर्करा के स्तर को कम कर सकती है।

एक छोटे से अध्ययन के अनुसार, बेल में शरीर की कोशिकाओं के कार्य को बाधित करने के लिए जिम्मेदार यौगिक होते हैं। शोधकर्ताओं ने कहा कि इस प्रकार के यौगिक (जो पौधों में अपेक्षाकृत सामान्य हैं) में यकृत की क्षति, न्यूरोडीजेनेरेशन (तंत्रिका कोशिकाओं के प्रगतिशील अध: पतन) और अन्य प्रतिकूल प्रभावों को प्रेरित करने की क्षमता हो सकती है।

बेल फल में ऐसे पदार्थ होते हैं जो शरीर द्वारा दवाओं को संसाधित करने के तरीके को प्रभावित कर सकते हैं। यदि आप दवा या पूरक लेते हैं, तो बेल फल लेने से पहले अपने डॉक्टर से बात करना सुनिश्चित करें।

चेतावनी

हालांकि, बेल एक फायदेमंद आयुर्वेदिक पौधा है, लेकिन इसके कुछ दुष्प्रभाव भी हैं। यह फल खाने से पहले, नीचे दी गई स्थितियों में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए:

  • उदर विकार: बेल फल की अत्यधिक खपत पेट में गैस का कारण बन सकती है, इसलिए गैस्ट्रिक परेशानियों वाले लोगों को सावधान रहना चाहिए।

  • कब्ज: बहुत ज्यादा बेल फल का सेवन पेट की खराबी और कब्ज का कारण बन सकता है।

  • गर्भावस्था: गर्भावस्था के दौरान किसी को बेल नहीं लेना चाहिए और स्तनपान के दौरान भी इससे बचना चाहिए।

  • डायबिटीज: जब इसका सेवन रक्त में शर्करा की मात्रा कम करने के लिए किया जाता है, तो व्यक्ति को शर्करा के स्तर का ध्यानपूर्वक निरीक्षण करते रहना चाहिए क्योंकि इससे शर्करा बहुत कम भी हो सकती है।

  • उच्च रक्तचाप: उच्च रक्तचाप होने पर इस फल को लेने से बचना चाहिए।

बेल पत्थर के विकल्प (bael pattar ke vikalpa)

बेल फल में टैनिन की उपस्थिति इस फल के स्वास्थ लाभ के पीछे के कारणों में से एक है। परंतु यह योगिक मैंगोस्टीन, ब्लैक टी, ग्रीन टी और क्रैनबेरी जैसी चीज़ों में भी उपस्थित होता है।

यदि आप दस्त से प्राकृतिक राहत की चाहत रखते हैं, तो अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से प्रोबायोटिक्स या कैमोमाइल चाय जैसे उपायों के बारे में भी बात कर सकते हैं।

उपसंहार

किसी भी अन्य भोजन / फलों की तरह, बेलपत्थर का सेवन करते समय भी हमें कुछ सावधानियां बरतनी चाहियें। आमतौर पर बेल फल का सेवन कम मात्रा में ही किया जाता है। यदि आपने पहले कभी बेल फल का सेवन नहीं किया है, तो यह जांचने के लिए कि आपका शरीर कैसे प्रतिक्रिया करता है, इसका कम मात्रा में ही सेवन करें।

सीमित शोध और सुरक्षित उपयोग संबंधित साक्ष्य की कमी के कारण, किसी भी स्वास्थ्य स्थिति के उपचार के रूप में बेल की खुराक नहीं लेनी चाहिए। यदि आप इसका उपयोग करने पर विचार कर रहे हैं, तो पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करना सुनिश्चित करें।

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