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दिमाग की नसों के दर्द का घरेलु इलाज (dimaag ki nason ke dard ka gharelu ilaj)

सर में दर्द एक आम शिकायत है| इसका कारण बहुत आम भी हो सकता है, और यह किसी भयंकर बीमारी का लक्षण भी हो सकता है| अगर यह बोहत लम्बे समय तक, और बार-बार होता है, तो आपको किसी विशेषज्ञ को अवश्य दिखाना चाहिए|

चेतावनी!

इससे पहले कि हम आगे बढ़ें, हम आपको यह बताना चाहेंगे कि सरदर्द के अनेक कारण हो सकते हैं - दिमाग की नसों का सुजना, उनमें कोई रुकावट, कोई अंदरूनी फोडा (ट्यूमर), अत्यधिक गैस बनने के कारण, इत्यादि| इनका इलाज भी अलग-अलग तरह से होता है|

इसकी सही वजह की पहचान करना अत्यंत कठिन होता है| अगर आपको सिरदर्द रहता है तो सबसे पहले आपको किसी भी विधि का इस्तेमाल करके, सबसे पहले इसकी सही वजह मालूम करनी चाहिए - चाहे किसी अच्छे वैद्य से मिलिए, या एलोपैथिक मशीनों (MRI इत्यादि) से अपना चेक-अप कराईये| इसके बाद ही आपका इलाज अच्छे से हो पायेगा|

इस लेख में हम दिमाग की नसों की वजह से होने वाले सर-दर्द और अन्य परेशानियों पर चर्चा करेंगे, और इनके कुछ घरेलु उपाय सुझाएंगे|

(इस लेख में हम जानेंगे - Home remedies of brain nerve pain, in Hindi)

Table of Contents (in Hindi)
  • दिमाग की नसों में किसी दिक्कत के लक्षण
  • दिमाग की नसों में दर्द क्यों होता है ?
  • दिमाग की नसों के दर्द का घरेलु इलाज

दिमाग की नसों में किसी दिक्कत के लक्षण (dimaag ki nason mein pareshani ke lakshan)

कई बार हमारा सिरदर्द दिमाग की नसों की किसी दिक्कत की वजह से हो सकता है, जैसे की नसों का सूखना, नसों में रुकावट, नसों की सूजन, नसों का फटना, फड़कना इत्यादि| पर कई बार तो ऐसी दिक्कत होने के बावज़ूद मरीज़ को पता ही नहीं चलता; यह अचानक से सामने प्रकट होती है|

यह जरुरी नहीं की अगर आपकी नसों में दिक्कत हो तो आपको सिरदर्द हो ही| यह कई और प्रकार से प्रतिलक्षित हो सकती है, जैसे की :

  • दिमाग की नसों का फड़कना, खासतौर से कनपटी के पास की नसों का| दिमाग की नसें लप-लप करती हैं, मरीज़ को आवाज़ आती है| यह किसी और को सुनाई नहीं देगी, सिर्फ मरीज़ इसको अपने दिमाग के अंदर सुन सकता है और नसों को फड़कते महसूस कर सकता है|
  • बार-बार चक्कर आना|
  • आँखों के आगे अँधेरा छा जाना|
  • सोते हुए झटका सा लगना, या जागे हुए भी झटका सा महसूस करना|

अगर आपको उपरोक्त कोई लक्षण हैं, और बार-बार होते हैं, तो यह हो सकता है की आपकी दिमाग की नसों में कोई रुकावट आ रही हो, ता वो सूख रही हों| ये नसों की रुकावटें ही आगे जाकर नसों को सुखा देती हैं, या ट्यूमर उत्पन्न कर देती हैं|

दिमाग की नसों का असर आँख पर भी पड़ सकता है, क्यूंकि दिमाग और आँख की नसें आपस में काफी करीब से जुडी हुई हैं| आपको अंधापन तक हो सकता है| इसलिए इस स्तिथि को हलके में न लें; तुरंत इलाज करना प्रारम्भ कर दें|

दिमाग की नसों में दर्द क्यों होता है ? (dimag ki nason mein dard kyon hota hai?)

  • अगर आप हमेशा चिंतित रहते हैं, तो इसका असर दिमाग की नसों पर भी पड़ सकता है| चिंता सौ बिमारियों को जन्म दे सकती है - यह उनमें से एक है|

  • कम रक्तचाप - ऐसा पाया गया है कि कम रक्तचाप वाले व्यक्तियों की दिमाग की नसें अक्सर सूख जाती हैं| अतः, अगर आपको सर की नसों में कुछ दिक्कत महसूस होती है, तो रक्तचाप की जाँच नियमित रूप से कराएं - रक्तचाप थोड़ा ज्यादा चाहे हो जाये, पर कम नहीं होना चाहिए| अगर रक्तचाप कम होगा तो आपकी दिक्कतें बढ़ेंगी| कम रक्तचाप को ठीक करने के लिए आप कुछ गर्म चीज़ ले सकते हैं, जैसे की कॉफ़ी, या आलू में नमक डालकर खा सकते हैं|

  • अत्यधिक काम-क्रीड़ा करने से भी ऐसा हो सकता है| अत्यधिक काम-क्रीड़ा करने से वात-दोष बिगड़ जाता है, और यह नसों पर असर डाल सकता है| अगर आप पुरुष हैं, और आपके अंडकोष में थोड़ी सूजन आ गयी है, तो इसका असर दिमाग की नसों पर भी पड़ सकता है| थोड़े दिन काम-क्रीड़ा से दूर रहें, और देखें की आपको आराम मिलता महसूस हो रहा है या नहीं|

दिमाग की नसों के दर्द का घरेलु इलाज

  • अगर आपकी दिमाग की नसों में ऐसी कोई भी दिक्कत है, तो ठंडी चीज़ें खाना या पीना तुरंत बंद कर दें| आइसक्रीम, कोल्ड-ड्रिंक, शरबत भूल जाएं| नहाना भी ठन्डे पानी से नहीं है - ख़ासतौर से सर पे ठंडा पानी नहीं डालना है; शरीर पर डाल सकते हैं|

  • ऐसी हालत में खट्टी चीज़ों से भी आपको बचना चाहिए, जैसे की अचार, नींबू, शिकंजी इत्यादि| हरी मिर्च खा सकते हैं|

  • घर का सादा खाना खाएं, बाजार का जंक फ़ूड नहीं| खाने में हरी-सब्ज़ी और सलाद ज्यादा खाएं| जिस चीज़ से भी अच्छा खून बने, वो आप खाइये| आप करेले का जूस भी पी सकते हैं, उसमें कुछ सब्ज़ियाँ भी मिला सकते हैं| स्वाद के लिए इसमें सेंधे का नमक डाल के पिएं| इसमें आप अज्वाइंन भी मिला सकते हैं - यह थोड़ी गर्म होती है, तो और भी अच्छा प्रभाव डालेगी| वैसे इसमें स्वाद तो आपमें से ज्यादातर को नहीं आएगा, पर स्वास्थ्य के लिए तो ऐसी चीज़ें ही अच्छी होती हैं - नाक बंद करके पी जाएं, एक प्याला ही सही|

यह सब परहेज़ आपको लम्बे समय तक करना है - जरूरत पड़े तो 2-3 साल तक| अगर आप ये सब परहेज़ कर लेंगे तो आपकी नसों की रुकावटें दूर हो जाएंगी| वर्ना अगर यह स्तिथि ब्रेन ट्यूमर में परिवर्तित हो गयी, या नसें सूख गयीं, तो आपको असहनीय पीड़ा भी भोगनी पड़ेगी, और अस्पताल के चक्कर भी लगाने पड़ सकते हैं|

इस सब परहेज़ का एक अतिरिक्त लाभ यह है कि आपके शरीर में कहीं और भी नसों में दिक्कत आ रही होगी, तो वो भी दूर हो जाएगी, जैसे आपके दिल की नसें, और धमनियाँ भी साफ़ हो जाएंगी|

  • दिमाग की नसों में तरावट लाने के लिए तेल-मालिश भी लाभप्रद साबित होगी| आप कोई भी गर्म तासीर वाला तेल लगा सकते हैं, जैसे की बादाम रोगन तेल|

  • नसों के रोगों के लिए प्राणायाम और ध्यान (meditation) बहुत लाभकारी होते हैं| हम तो यहाँ तक कहते हैं कि, बाकी सारे इलाज और परहेज़ एक तरफ, और प्राणायाम और ध्यान से होने वाले लाभ एक तरफ, फिर भी प्राणायाम और ध्यान का पड़ला भारी पड़ेगा|

चेतावनी

कुछ लोग इस बीमारी के लिए बिजली के झटके (electric shock therapy) का सहारा लेते हैं| इससे बचना चाहिए - इसके कई दुष्परिणाम भी हो सकते हैं, जैसे की दिमाग़ सुन्न हो सकता है|

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