post-thumb

ग्लूकोमा के लक्षण और इलाज़ (glaucoma ke lakshan aur ilaj)

एक दिन में सोकर उठा और मेरी बायीं आँख में मुझे धुंधलापन महसूस हुआ| में नींद में ही था, तो मुझे लगा की थोड़ी देर में खुद ही ठीक हो जायेगा| पर मेरी रूह काँप उठी जब मैंने पाया की ये धुंधलापन स्थायी है - मैंने आँख धोईं, थोड़ी देर के लिए फिर से सो गया, सब कुछ किया पर ये धुंधलापन नहीं गया| मुझे विश्वास नहीं हो रहा था की ये मेरे साथ क्या हो रहा है| ये पूर्ण अंधापन नहीं था, अपितु बायीं आँख के करीब एक-चौथाई हिस्से पर पर्दा सा डल गया था| तब मेरी उम्र 35 की थी|

मेरी आँख 6 / 6 विज़न की हैं| यहाँ तक की मुझे 8 साल पहले इंडियन एयरफोर्स में फ्लाइट लियूटेनेंट के रूप में चयनित भी किया गया था, जहाँ मेरी आँखों की ग़हन जाँच हुई थी| में आज भी 37 की उम्र में कोई चश्मा नहीं पहनता| न मुझे कोई दर्द हुआ, न आँख में कभी कोई दिक्कत| फिर ये अचानक से क्या हुआ ? ऐसे कई सवाल मेरे जहन में गूँज रहे थे|

जी हाँ, ये बीमारी मुझे हो चुकी है और एक महीने में ये ठीक भी हो गयी| पर आँखों के डॉक्टर ने अपने हाथ खड़े कर दिए थे| उसने कहा की इसका कोई इलाज नहीं है| पर मेरे पिता की होमियोपैथी दवाइओं से मुझे एक हफ्ते में फिर से पूरा दिखने लगा| हालाँकि पूरा ठीक होने में 3-4 महीने लगे|

जब में दुबारा उस डॉक्टर के पास गया तो उसने मुझसे कहा की इतनी जल्दी इतना सुधार बहुत कम ही देखने को मिलता है| उसने मुझसे ये भी कहा की ये बीमारी बार-बार लौट के भी आती है, अगर ध्यान न रखा जाये| और दोबारा होने पर इसके सही होने की सम्भावना बहुत ही कम होगी|

में काफी डर गया था, क्यूंकि यह बीमारी आने का कोई संकेत नहीं देती| अचानक से हो जाती है| आजकल भी में कई बार सुबह उठकर अपनी द्रिष्टि की जाँच करता हूँ की मुझे सब दिख रहा है की नहीं| आप समझ सकते हैं की एक युवा के लिए ये अनुभव कितना डरावना रहा होगा, जबकि मेरा अधिकतर काम कंप्यूटर पर ही होता है| मैं सिर्फ अँधा ही नहीं होता, अपितु बेरोज़गार और दूसरों पर आश्रित भी|

इस लेख में, मैं आप लोगों के साथ अपने इस अनुभव और इस बीमारी के बारे में मेरे ज्ञान को सांझा करना चाहूंगा|

Table of Contents (in Hindi)
  • ग्लूकोमा (कांचबिंद) क्या है ?
  • ग्लूकोमा के लक्षण और पहचान
  • ग्लूकोमा के संभावित कारण
  • ग्लूकोमा से बचाव
  • ग्लूकोमा का इलाज़
  • ग्लूकोमा के मरीजों के लिए टिप्स

ग्लूकोमा (कांचबिंद) क्या है ? (glaucoma kya hai?)

ग्लूकोमा एक ख़तरनाक बीमारी है और सही समय पर इसका पता नहीं लगने पर यह अंधेपन का कारण भी बन सकती है। यह जरूरी नहीं की इससे पूर्ण अंधापन हो| इससे अर्ध-अंधापन भी हो सकता है, यानि नज़र के सामने कुछ हिस्से में पर्दा सा डल जाता है, जैसे की हम images को blur करते हैं|

अगर में अपनी बात करूँ, तो मुझे हफ्ते तक बायीं आँख से कुछ ऐसे दिखता था: kaanch bind

मोतियाबिंद के बाद, ग्लूकोमा देश में अंधत्व का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। भारत में इसके 10 लाख से अधिक मरीज हैं।

ग्लूकोमा आँख के अंदर उच्च दवाब के कारण होता है| उच्च दबाव ऑप्टिक तंत्रिका (optic nerve) को नुकसान पहुंचा सकता है| यही वो नस होती है जो आँखों से संकेतों को मस्तिष्क तक प्रसारित करती है। इस तरह से यह बीमारी आपको अंधेपन की ओर धकेलती है।

उच्च दबाव से ऑप्टिक तंत्रिका को होने वाला नुक़सान अपरिवर्तनीय होता है। एक बार अगर ऑप्टिक तंत्रिका का कोई हिस्सा काम करना बंद कर दे, तो इसे वापस चालू नहीं किया जा सकता है। कोई भी उपचार ऑप्टिक तंत्रिका के केवल उस हिस्से को बचा सकता है जो अभी भी काम कर रहा है और स्वस्थ है।

ग्लूकोमा के लक्षण और पहचान (glaucoma ke lakshan aur pehchaan)

ज्यादातर मामलों में ग्लूकोमा शुरू होने का कोई लक्षण नहीं होता है। इस बीमारी का प्रभाव इतना धीरे-धीरे होता है, कि आप तब तक अपनी दृष्टि में बदलाव को महसूस नहीं कर पाते जब तक कि यह बीमारी बहुत उन्नत अवस्था में न पहुंच जाये। इसलिए 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को नियमित रूप से आंखों की जांच करवानी चाहिए।

ग्लूकोमा के विभिन्न प्रकार हैं, और इनके लक्षण भी थोड़े भिन्न हैं|

  • ओपन एंगल ग्लूकोमा - सबसे सामान्य प्रकार के ग्लूकोमा का कोई लक्षण नहीं होता है। हम इसे केवल नेत्र परीक्षण द्वारा या जब यह हो जाता है तब पहचान कर सकते हैं। इस बीमारी के उन्नत चरणों में सुरंग दृष्टि (tunnel vision) हो सकती है| जब मुझे यह हुआ था तो मुझे एक महीने तक सीधी रेखाएं भी मुड़ी हुई प्रतीत होती थीं|
  • एक्यूट एंगल क्लोजर ग्लूकोमा - यह एक प्रकार का ग्लूकोमा है जो सिरदर्द और लाल आंख जैसे लक्षण के साथ बहुत तेजी से प्रकट हो सकता है। यहां, आंख का दबाव अचानक बढ़ जाता है, क्योंकि आंख से तरल पदार्थ (aqueous humor) का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है, क्योंकि अगर एक घंटे के भीतर दबाव कम नहीं होता है, तो यह ऑप्टिक तंत्रिका को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है।
  • जन्मजात ग्लूकोमा - जन्म के समय से भी ग्लूकोमा मौजूद हो सकता है, अगर ऑप्टिक तंत्रिका पहले से ही क्षतिग्रस्त हो।

पर आखिर ग्लूकोमा की जांच कैसे होती है?

ग्लूकोमा का पता लगाने के लिए डॉक्टरों द्वारा निम्नलिखित तरीके अपनाये जाते हैं:

  • आँखों के अंदर के दबाव की जाँच करना - आंख के भीतर अधिक दबाव होना किसी भी समय ग्लूकोमा होने की सम्भावना को बढ़ा देता है।
  • दृश्य क्षेत्रों (visual fields) की जांच - आपको एक मशीन के अंदर अलग-अलग बिंदुओं को पहचानने को कहा जायेगा| अगर कुछ बिंदु आपको दिखाई नहीं देते तो आपको अर्ध-अंधापन हो गया है|
  • ऑप्टिक डिस्क को देखने के लिए आंख के पीछे की जांच (जो ऑप्टिक तंत्रिका का अग्र भाग होता है) - डॉक्टर आपकी आँखों में झाँककर देखेगा| यदि ग्लूकोमा के कारण कोई क्षति हुई है, तो वो यहाँ दिख जाएगी।

ग्लूकोमा के संभावित कारण (glaucoma ke sambhavit karan)

आँख के अंदर उच्च दबाव इसका सबसे बड़ा कारण होता है| आंखों का दबाव एक तरल पदार्थ (aqueous humor) के निर्माण के कारण होता है जो आंख के अंदर भरा होता है। जब यह द्रव सामान्य दर से बाहर नहीं निकल पाता या आवश्यकता से अधिक बनने लगता है तो आंखों के भीतर का दबाव बढ़ जाता है।

लेकिन विभिन्न अन्य कारकों के कारण इसके होने की सम्भावना और भी बढ़ सकती है, जैसे कि:

  • आंख के भीतर की सूजन
  • लंबे समय तक स्टेरॉयड लेने से
  • आंख पर हुए किसी आघात के कारण
  • मधुमेह, हृदय रोग, और उच्च रक्तचाप के मरीजों में इसकी सम्भावना बढ़ जाती है|
  • ग्लूकोमा पीढ़ी दर पीढी होता हुआ भी पाया गया है। कुछ व्यक्तियों में उच्च नेत्र दबाव और ऑप्टिक तंत्रिका क्षति से संबंधित जीन की पहचान भी की गयी है।

आयुर्वेद के अनुसार ये कफ़-दोष के कारण होता है| कफ़ शरीर में तरल पदार्थों को नियंत्रित करता है।

ग्लूकोमा से बचाव (glaucoma se bachav)

ग्लूकोमा का सबसे अच्छा उपचार उससे बचाव ही है|

  • वैसे ग्लूकोमा किसी भी उम्र में हो सकता है, परन्तु 40 साल की उम्र के बाद इसके होने की सम्भावना बढ़ जाती है| इसलिए 40 साल से अधिक उम्र वाले व्यक्तियों को आँखों की नियमित जाँच करवानी चाहिए, ताकि इसके होने से पहले ही इसका पता चल जाये|

  • नियमित और सुरक्षित रूप से किया गया मामूली व्यायाम आंख के दबाव को कम करके ग्लूकोमा को रोकने में मदद कर सकता है।

  • आंखों की सुरक्षा करें - आंखों की गंभीर चोटों से ग्लूकोमा हो सकता है। ड्राइविंग करते हुए, या बिजली का काम करते हुए आँखों की सुरक्षा के लिए सुरक्षात्मक चश्मे / काले चश्मे पहने। कंप्यूटर या मोबाइल में अधिक काम करने वाले लोगों को ऐसा चश्मा पहनना चाहिए जिससे ज्यादा हानिकारक किरणे आँखों में प्रवेश ना कर पाएं|

  • तनाव से बचें - अक्सर ये पाया गया है की मानसिक तनाव के कारण ग्लूकोमा होने की सम्भावना बढ़ जाती है|

ग्लूकोमा का इलाज़ (glaucoma ka ilaj)

अगर एक बार ग्लूकोमा हो जाये तो इसका उपचार तुरंत शुरू करना चाहिए|

यदि इसका इलाज ना किया जाये तो ग्लूकोमा अंततः अंधेपन का कारण बनता है। यहां तक कि उपचार करने के बाद भी, ग्लूकोमा वाले लगभग 10 प्रतिशत मरीज़ 20-25 वर्षों के भीतर कम से कम एक आंख से अंधे हो जाते हैं। आप इस बात से इस स्तिथि की गंभीरता का अंदाज़ा लगा सकते हैं|

  • आंखों में डालने की दवाई - ये या तो आपकी आंख में तरल पदार्थ का निर्माण कम कर देंगी या उस द्रव्य के लिए आंखों से निकलना आसान बना देंगी।

  • इसका एक उपचार लेजर द्वारा किया जाता है, जिसे लेजर इरिडोटॉमी (laser iridotomy) कहा जाता है। यहां, आँख की पुतली (iris) के भीतर एक छोटा सा छिद्र किया जाता है, जो एक सुरक्षा वाल्व की तरह काम करता है। यदि दबाव बहुत अधिक बढ़ जाता है, तो आँख के अंदर का पानी यहाँ से बाहर प्रवाहित हो जाता है। तो इस तरह से आँख के अंदर का दवाब कभी इतना नहीं बढ़ता की उससे ऑप्टिक तंत्रिका खराब हो जाये|

  • ग्लूकोमा के गंभीर मरीजों की अक्सर ट्रेबक्युलेक्टमी सर्जरी की जाती है। परन्तु मधुमेह और उच्च रक्तचाप के रोगियों में यह अक्सर असफल हो जाती है| ऐसे मरीजों के लिए एक नयी तकनीक विकसित की गयी है जो कारगर साबित हो रही है| इस तकनीक में मरीज की आँख में ग्लूकोमा वॉल्ब लगाया जाता है|

  • नेत्र तर्पण (Netra Tarpana) - आंखों के चारों ओर घी लगाने से ऑप्टिक तंत्रिका को मजबूती प्रदान होती है और अगर दर्द है तो वह कम होता है|

  • ग्लूकोमा के लिए योग - ध्यान लगाने (meditation) से धमनियों और आँख के प्रेशर को कम किया जा सकता है| प्राणायाम से भी इसमें फायदा होता पाया गया है| योग करने से मानसिक तनाव भी कम होता है, जोकि ग्लूकोमा होने का एक कारण माना जाता है|

  • इस रोग में त्रिफला चूर्ण रोजाना लेना बहुत प्रभावी साबित होता है।

ग्लूकोमा के मरीजों के लिए टिप्स (glaucoma ke marijon ke liye saavdhaniyan)

एक बार होने पर ग्लूकोमा का असर आजीवन रहता है| आपको अपने नेत्र चिकित्सक के पास जाकर नियमित रूप से अपनी आँखों का चेकअप कराना होगा।

इसके अलावा आप अपनी आँखों को स्वस्थ रखने के लिए निम्लिखित चीजें कर सकते हैं।

  • पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ खाएं, जैसे की हरी पत्तेदार सब्जियाँ और साग, या मछली (जिसमे ओमेगा -3 फैटी एसिड होता है)| कुछ अध्ययनों के अनुसार, ग्लूकोमा होने पर एंटीऑक्सिडेंट युक्त भोजन मदद कर सकता है।

निम्लिखित खाद्य प्रदार्थ ग्लूकोमा में लाभकारी हैं:

  • मकई, राई, जौ, बाजरा|
  • मूली, गोभी, बैंगन, शलजम, काली मिर्च, पालक, गाजर, मटर, लहसुन, प्याज|
  • नाशपाती, सेब, आड़ू, आम, नींबू, ब्लूबेरी और सूखे फल (ड्राई फ्रूट्स)|
  • आमला, अदरक, सौंफ, हल्दी मिलाकर हर्बल चाय/काढ़ा बनाने से काफी फायदा होता है|

ग्लूकोमा के मरीजों को डॉक्टर अक्सर केले खाने को कहते हैं| मुझे भी मेरे डॉक्टर ने केले खाने की सलाह दी थी|

निम्लिखित खाद्य प्रदार्थ ग्लूकोमा में नुकसानदायक माने जाते हैं:

  • चावल, गेहूं, जई, सोया और सेम।

  • लाल मांस और समुद्री भोजन से भी बचना चाहिए, परन्तु सीमित मात्रा में चिकन, टर्की और मछली खा सकते हैं।

  • आलू, टमाटर, खीरा, तोरई, भिंडी|

  • तरबूज, खरबूजा, अनानास, संतरा, एवोकैडो, अंगूर, कीवी और अंजीर।

  • धूम्रपान न करें। धूम्रपान रक्तचाप और आंखों की सूजन को बढ़ाता है और इस प्रकार यह ग्लूकोमा होने के खतरे को बढ़ा सकता है।

  • साथ ही सोडा, कॉफी और चाय पीना कम कर दें। एक अध्ययन के अनुसार केवल एक कप कॉफी आपकी आंखों में दबाव को एक घंटे से अधिक समय के लिए बढ़ा सकती है।

  • नियमित व्यायाम से आंखों में दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है और आपकी आंख की नसों में रक्त प्रवाहित हो सकता है। पर ऐसी कोई गतिविधि ना करें जिससे की दबाव बढ़े| अपने डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ से राय-मशविरा करके ही कोई व्यायाम करें।

  • कुछ योगासन आँखों पर दवाब बढ़ा सकते हैं, खासतौर से वो आसन जिसमें आपका सर बाकी शरीर से नीचे हो जाता है, जैसे की शीर्षासन, अधोमुख श्वानासन, उत्तानासन, सर्वांगासन, उर्ध्व धनुरासन/चक्रासन, मत्स्यासन| अगर आपको ग्लूकोमा हो चूका है तो इन आसनों को ना करें|

  • लेटते हुए अपने सिर को थोड़ा ऊपर उठा कर रखें। इसके लिए आप किसी तकिये का उपयोग कर सकते हैं। इससे आपकी आंखों पर कम दबाव पड़ेगा।

  • बाहर जाने पर धूप का चश्मा पहनना सुनिश्चित करें, खासकर गर्मियों में या उच्च चमक वाली सतहों के आसपास (जैसे रेत, बर्फ और पानी)। जब आपको ग्लूकोमा होता है, तो आपकी आंखें चमक के प्रति बहुत अधिक संवेदनशील हो जाती हैं।

Share on:
comments powered by Disqus