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हरीतकी चूर्ण के फायदे (haritaki churna ke fayde)

हरीतकी एक पेड़ है जोकि भारत और दक्षिण एशिया में पाया जाता है| इसके सूखे हुए फल को ही हम लोग हरीतकी के नाम से आयुर्वेद में प्रयोग करते हैं| हरीतकी (Chebulic myrobalan) को हरड़ (harad) के नाम से भी जाना जाता है|

हरीतकी को आयुर्वेद में दवाइयों का राजा (king of medicine) कहा गया है| इसको आयुर्वेद में माँ से भी भड़कर दर्जा दिया गया है, क्यूंकि आयुर्वेद के अनुसार ये हो सकता है की माँ से कोई भूल हो जाये जिससे आपको नुक़सान हो जाये, परन्तु हरड़ खाने से कभी आपको नुक़सान नहीं होता है| खासतौर से ये वाद दोष को सही करने के लिए ग्रहण किया जाता है|

इसका सेवन हम अक्सर हरीतकी चूर्ण के रूप में करते हैं| ये देखने में कत्थई रंग का होता है और खाने में कड़वा होता है|

Table of Contents
  • हरीतकी के फायदे
  • हरीतकी का सेवन कैसे करें?
  • संभावित दुष्प्रभाव

हरीतकी के फायदे (haritaki ke fayade)

हरीतकी हमारे पेट और आंत के लिए बहुत लाभदायक है| इससे कई रोगों के इलाज में मदद मिलती है, खासतौर से मल से सम्बंधित रोग, जैसे की कब्ज़, बवासीर (पाइल्स), फिस्टुला इत्यादि|

कब्ज सही करता है (helpful in constipation)

अगर मुझे कब्ज है, तो में पतंजलि हरीतकी चूर्ण के एक चौथाई चम्मच ले लेता हूँ| इसका असर बहुत जल्द होता है (कभी-कभी 15 मिनट के अंदर) और इससे आँतों को कोई नुक़सान भी नहीं पहुँचता| जबसे मुझे हरीतकी चूर्ण मिला है, मेरी कब्ज की समस्या ही ख़त्म हो गयी है|

अगर आप त्रिफला चूर्ण लेते हैं, तो आपको शायद पता होगा की हरीतकी को त्रिफला में भी डाला जाता है| परन्तु अलग से लेने पर इसका असर कहीं अधिक होता है| त्रिफला लेने से ये असर नहीं होता|

बवासीर और फ़िशर (piles and fissure)

हरीतकी कब्ज को सही करता है, यदि कब्ज पुराना हो तो भी| और हमे पता है की बवासीर और फ़िशर भी कब्ज-जनित रोग ही हैं| इसीलिए हरीतकी का सेवन इनके इलाज में भी अच्छा साबित होता है|

लम्बे समय में तो ये हितकारी है है, इसका एक फायदा तुरंत भी मिलता है| हमे पता है की बवासीर और फ़िशर के रोगियों को मल-त्याग करते हुए काफी दर्द होता है| हरीतकी मल को बहुत मुलायम बना देता है, और इस तरह से मल-द्वार में हुई चोट या किसी और परेशानी को सही होने का मौका मिल जाता है|

पाचन सही करता है (improves digestion)

ये पाचन को भी सही करता है| अगर आपको अपाचन की समस्या है, जैसे की खाना खाने के बाद आपको थोड़ा भारीपन रहता है, तो खाने के बाद आप थोड़ा सा हरीतकी चूर्ण से सकते हैं|

शहद के साथ हरीतकी सेवन करने से उलटी होना बंद हो जाती है|

विटामिन्स तथा मिनिरल्स (vitamins and minerals)

हरड़ एंटी-ऑक्सीडेंट होता है| कुछ भूढ़े चूहों में इसके प्रयोग के अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं|

ऐसा इसलिए है, क्यूंकि हरीतकी में काफी विटामिन्स तथा मिनिरल्स होते हैं, जिसमे काफी एंटी-ऑक्सीडेंट्स (antioxidants) भी हैं, जैसे की विटामिन C, विटामिन E, पोटैशियम, आयरन, कॉपर, सेलेनियम, टैनिक एसिड, गैलिक एसिड, इत्यादि|

हरीतकी खाने से प्रतिरोधक क्षमता में भी भढोत्तरी होती है|

मधुमेह में लाभप्रद है (beneficial in diabetes)

हरड़ एंटी-डायबिटिक भी होता है| हरीतकी रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में काफी कारगर पाया गया है।

हरीतकी पाउडर के नियमित उपयोग से रक्त शर्करा का स्तर प्रभावी रूप से नीचे आता है और विभिन्न मधुमेह के लक्षणों से राहत मिलती है, जैसे बार-बार पेशाब आना, अधिक प्यास लगना, वजन कम होना आदि।

कैविटीज को रोकने में मदद करता है (stops cavity formation in teeth)

ओरल हेल्थ एंड प्रिवेंटिव डेंटिस्ट्री में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार हरीतकी आधारित माउथवॉश कैविटीज को रोकने में मदद कर सकता है।

शोधकर्ताओं ने अपने शोध में ये पाया कि हरीतकी-आधारित माउथवॉश मुँह के बैक्टीरिया के स्तर को कम करने में काफी प्रभावी है। इससे दाँतों में कैविटी रोकने में मदद मिलती है|

त्वचा के रोगों में प्रभावी (effective in skin diseases)

हरिताकी मजबूत एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल और एंटीफंगल गुणों वाला फल है| एक प्राकृतिक टोनर होने के नाते, यह त्वचा की आंतरिक परतों से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है, तथा संपूर्ण त्वचा के स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।

इस चमत्कारी जड़ी बूटी में मौजूद बायोएक्टिव यौगिकों का उपयोग प्राचीन काल से त्वचा के विभिन्न संक्रमणों, जैसे कि मामूली घावों, अल्सर, त्वचा के कवक/फंगस, मुँहासे, दाने, चकत्ते, फोड़े आदि के इलाज के लिए किया जाता रहा है।

इसके लेप का इस्तेमाल एक्नी और पिम्पल (Acne and Pimple) को ठीक करने के लिए भी किया जाता है| इसका फेस मास्क भी बनाया जाता है|

इन सबके अलावा भी हरीतकी के काफी लाभ हैं| अतिरिक्त वसा को कम करने में हरितकी कारगर सिद्ध होता है। इससे वजन घटाने में मदद मिलती है| कुछ अध्ध्यनों के अनुसार ये हृदय में कोलेस्ट्रॉल घटाने में भी लाभप्रद है|

हरीतकी का सेवन कैसे करें? (how to consume haritaki?)

हरीतकी को आप पानी, दूध या शहद के साथ ले सकते हैं| थोड़े गुनगुने पानी के साथ लेना सबसे अच्छा होता है|

दिन में एक या दो बार करीब एक-चौथाई चम्मच लेना काफी होता है| अपने लिए सही मात्रा का पता करने के लिए आप किसी वैद्य से भी परामर्श ले सकते हैं|

संभावित दुष्प्रभाव (possible ill-effects)

हरीतकी के दीर्घकालिक प्रयोग के प्रभाव ज्ञात नहीं है| साथ ही साथ इसपर हुए ज़्यादातर अध्ययन जानवरों पर किये गए हैं, इंसानो पर नहीं| परन्तु भारत के वैद्यों ने दीर्घकालीन समय से इसका प्रयोग कई रोगों के इलाज में किया है, इसलिए इसका सेवन करने में कोई दिक्कत नहीं है| पर एक-दो सावधानियों को बरतने की जरूरत है|

डायबिटीज के रोगियों को हरीतकी का उपयोग करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य लेना चाहिए। चूंकि हरितकी रक्त शर्करा के स्तर को कम कर सकती है, इसलिए रक्त-शर्करा कम करने वाली दवाओं के संयोजन में इसका उपयोग करना हानिकारक प्रभाव डाल सकता है।

चेतावनी
इसके अलावा, हरीतकी का उपयोग गर्भवती महिलाओं, बच्चों, या रोगियों को बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं करना चाहिए।
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