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हर्निया के लक्षण और घरेलु इलाज (hernia ke lakshan aur gharelu ilaj)

क्या आपको अचानक से शरीर के किसी हिस्से में उभार निकला हुआ महसूस हो रहा है, किसी ऐसी जगह जो अप्राकर्तिक है? यह हर्निया हो सकता है|

इस लेख में हम आपके हर्निया से सम्बंधित कई सवालों के जवाब देने की कोशिश करेंगे|

Table of Contents (in Hindi)
  • हर्निया क्या होता है ?
  • हर्निया के प्रकार
  • इनगुनल हर्निया
  • हाइएटस/हेटस हर्निया

हर्निया क्या होता है ? (Hernia kya hota hai?)

अगर आम भाषा में कहें, तो हर्निया किसी भी उस स्तिथि को कहते हैं जिसमें कोई अंग अपनी जगह से हटकर कहीं और चला जाता है|

हर्निया के प्रकार (Hernia ke prakar)

हर्निया कई प्रकार के होते हैं:

types of hernia

  • हाइएटस हर्निया (Hiatus hernia) - पेट थोड़ा सा सीने के तरफ चला जाता है|
  • इनगुनल हर्निया (Inguinal hernia) - अंडकोष के ठीक ऊपर वाले हिस्से में होता है|
  • अम्बिलिकल हर्निया (Umbilical hernia) - नाभि में उभार आ जाता है|
  • फेमोरल हर्निया (Femoral hernia)
  • इंसिसनल हर्निया (Incisional hernia) - एब्डॉमिन में पहले कभी हुए ऑपरेशन की वजह से माँसपेशियों की दीवार कमज़ोर हो जाती है और अंदर के अंग बाहर निकल आते हैं|

हर्निया और भी कई तरह के होते हैं, जो हर्निया की जगह के हिसाब से जाने जाते हैं| पर ऊपर लिखे गए हर्निया सबसे आमतौर से होने वाले हर्निया हैं|

इस लेख में हम इनगुनल हर्निया और हाइएटस हर्निया के बारे में बात करेंगे, क्यूंकि इनके मामले ही सबसे ज्यादा होते हैं|

इनगुनल हर्निया (Inguinal hernia)

इनगुनल हर्निया / जंघास हर्निया क्या है? (Inguinal hernia kya hota hai?)

इनगुनल हर्निया पेट की सामग्री का जंघास या ऊसन्धि (groin) क्षेत्र में एक फ़ैलाव है। या तो पेट की चर्बी या आंत ऊसन्धि क्षेत्र में फैल सकती है।

inguinal hernia

इनगुनल हर्निया के लक्षण (Inguinal hernia ke lakshan)

जब किसी को इनगुनल हर्निया होता है, तो वे अपने ऊसन्धि (groin) क्षेत्र में एक उभार देखते हैं| लेटने पर ये उभार कम हो जाता है, पर खड़े होने पर, भार उठाने पर, खांसने पर या चलने फिरने से ये बढ़ जाता है| कभी-कभी इसमें दर्द भी होता है|

डॉक्टर इसकी पुख्ता पहचान करने के लिए ultrasound करवाते हैं|

इनगुनल हर्निया के कारण (Inguinal hernia ke hone ke karan)

आमतौर पर, यह पुरुषों में महिलाओं की तुलना में लगभग दस गुना अधिक देखा जाता है| चार में से एक पुरुष जंघास हर्निया विकसित कर सकता है। आइये इसके पीछे का कारण जान लेते हैं|

पेट में पुरुष बच्चे के विकास के दौरान, जब अंडे पेट से अंडकोश में उतरते हैं, तो एक क्षेत्र रिक्त रह जाता है, जहां बड़े होने पर पुरुषों के पेट की सामग्री फैल सकती है और जंघास हर्निया कर सकती है|

अतः यह जन्मजात भी होता है, और बड़े होने पर भी हो सकता है| इसके बाद में होने के कई कारण हो सकते हैं:

  • कब्ज़ की वजह से पेट का प्रेशर बना रहना|
  • बहुत ज्यादा और ज़ोर-ज़ोर से खाँसने की वजह से|
  • बहुत ज्यादा व्यायाम करने के कारण|
  • बहुत वज़न उठाने के कारण|
  • अत्यधिक मोटापे के कारण|
  • महिलाओं को ये गर्भावस्था के दौरान हो सकता है|
  • अगर आपकी आँतों में लम्बे समय से सूजन है, तो उससे भी हर्निया होने की सम्भावना बढ़ जाती है|

इनगुनल हर्निया का उपचार (Inguinal hernia ka upchar)

अगर कोई दिक्कत नहीं है, तो ऑपरेशन करवाना अति-आवश्यक नहीं है| बस आपको इसका ध्यान रखना होगा और सावधानियां बरतनी होंगी|

पर अगर आपको यह उभार बढ़ता महसूस होता है, दर्द होता है, या मल-त्याग में परेशानियां आने लगती हैं, तो आपको तुरंत इसका इलाज करवाना चाहिए| कुछ मामलों में, कुछ जटिलताएं भी हो जाती हैं। उदाहरण के लिए, यदि आंतों का कुछ हिस्सा हर्निया के छेद में फंस जाता है, तो इसकी रक्त आपूर्ति बंद हो सकती है, जिससे आंत के ऊतकों की मृत्यु हो सकती है। इसे “strangulated hernia” कहा जाता है। यह आपातकालीन स्तिथि होती है| ऐसा होने पर आपको मरीज को तुरंत हॉस्पिटल ले जाना चाहिए|

जहाँ तक सर्जरी का प्रश्न है, तो डॉक्टरों के पास दो विकल्प होते हैं:

  • Open Surgical Repair - इसमें हर्निया वाले ग्रोइन क्षेत्र में चीरा लगाया जाता है, तथा पेट की सामग्री को वापस ढकेल दिया जाता है| इसके पश्चात जाली के एक टुकड़े (mesh) का उपयोग करके, इस छेद को बंद कर दिया जाता है| पर ऑपरेशन के बाद भी थोड़ी असहजता बनी रहती है| करीब 5-6 हफ्ते तक थोड़ा दर्द भी रहता है|

open surgical repair for inguinal hernia

  • Laparoscopic Surgery - इसमें पेट और आँतों के हिस्से में कुछ छोटे छेद किये जाते हैं और फिर रोबोट या दूरबीन की सहायता से हर्निया को ठीक किया जाता है| इस सर्जरी में हर्निया वाली जगह चीरा नहीं लगाया जाता| इस सर्जरी में इन्फेक्शन का खतरा कम होता है और मरीज़ जल्दी ठीक हो जाता है| पर ऑपरेशन कोई भी हो, थोड़ी असहजता और दर्द तो कुछ दिन रहेगा ही|

इनगुनल हर्निया का देसी इलाज़ (Inguinal hernia ka desi ilaj)

अगर प्रारंभिक अवस्था का इनगुनल हर्निया है, तो इसको योग, आयुर्वेद, या होमियोपैथी से ठीक किया जा सकता है| पर कोई भी इलाज खुद से ना करें| किसी वैद्य से परामर्श अवश्य लें|

चेतावनी

पर ध्यान रखिये, यह एक छेद है, जो खुद से आराम से नहीं भरा जा सकता| अधिकांश मामलों में रोगी को इसके साथ जीना सीखना होता है या ऑपरेशन करवाना होता है|

  • प्राणायाम - आप धीरे-धीरे कपालभाति, अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका इत्यादि कर सकते हैं| पर इन्हें कभी भी तेजी से या ज़ोर लगाकर ना करें| कपालभाती से आंतें मज़बूत होती हैं, पर जैसा की हमने पहले कहा इसे बहुत ही धीरे-धीरे करें, बहुत धीरे|

  • योगासन - आप मंडूकआसन (mandukaasan), योगमुद्रासन (yogmudraasan), वक्रासन (vakraasan), गोमुखासन (gaumukhaasan) या लेट कर पवनमुक्तासन (pawanmuktaasan) कर सकते हैं|

    इन आसनों को असल में कैसे करना है, वो इस लेख में बताना संभव नहीं है| परन्तु इन ज्यादातर आसनों में हम हथेली को पेट या नाभि पर रखकर करते हैं, जैसे की इनगुनल हर्निया के मरीजों को मंडूकआसन अपने पेट पर हथेली रख कर करना चाहिए|

    पीछे झुकने वाला कोई भी आसन ना करें| इससे पेट और आंतों पर जोर पड़ता है| आगे झुकने वाले आसन आप कर सकते हैं| उससे आँतें मज़बूत होती हैं|

  • जड़ी-बूटी - आप हर्निया की प्रारंभिक अवस्था ठीक करने के लिए वृद्धिवाधिका वटी, या पुनार्नावादी मंडूर ले सकते हैं|

इसके अलावा होमियोपैथी और नेचुरोपैथी में इसके कई इलाज हैं| उसके लिए आपको किसी होमियोपैथी या नेचुरोपैथी के डॉक्टर से परामर्श लेना होगा|

इनगुनल हर्निया में सावधानियाँ (Inguinal hernia mein saavdhaniyan)

कुछ लोगों में इसके पुनरावृत्ति की संभावना अधिक होती है| खासतौर से वो लोग, जो मोटे हैं, धूम्रपान करते हैं, स्टेरॉयड पर हैं, या भारी वजन उठाते हैं| हर्निया होने से बचाव के लिए, या फिर अगर आपको ये हो गया है, तो इसको और बिगड़ने से रोकने के लिए, निम्लिखित बातों का ध्यान रखें:

  • कभी भी भारी वजन ना उठाएं, ना ही ऐसा कोई व्यायाम करें जिससे पेट पर ज़ोर पड़े| यानी पेट में दवाब बनाने वाली कोई भी चीज़ या गतिविधि, उस बंद किये छेद को फिर से खोल सकती है, या बड़ा कर सकती है|

  • कोशिश करें की कब्ज न बनने पाए| नियमित रूप से पानी पिएं और पौष्टिक आहार खाएं| कब्ज न होने पाए, इसके लिए सोने से पहले त्रिफला चूर्ण खाएं या आवंला-ऎलोवेरा जूस का सेवन करें| कब्ज होने पर हरीतकी चूर्ण बहुत कारगर साबित होता है| यह भी देखा गया है कि ज्यादा गुस्सा करने से भी कब्ज़ होता है| इसलिए अपने चित्त को शांत रखें|

  • हरी सब्जियां खाएं, फल खाएं| सुबह फल पहले खाएं, पका हुआ खाना बाद में| खाने के एक घंटे पहले या एक घंटे बाद तक पानी ना पिएं| बहुत प्यास लगे या एसिडिटी हो तो एक-दो घूँट पानी से ज्यादा ना पिएं|

  • जो भी खाएं उसे अच्छे से चबा-चबा कर खाएं, ताकि आँतों पर कम ज़ोर पड़े| जैसा की आयुर्वेद में कहा जाता है, खाने को मुँह में ही पानी बनाके पिएं, खाएं या निगलें नहीं| दांतों का काम आँतों से ना लें|

  • अगर आपको खांसी रहती है तो इसका उपचार तुरंत करवाएँ|

  • धूम्रपान करना बंद कर दें| धूम्रपान से मासपेशियाँ कमजोर होती हैं|

  • हर्निया को और बढ़ने से रोकने के लिए आप ट्रस (truss for hernia) का प्रयोग कर सकते हैं| उपरवाले और नीचेवाले हर्निया के लिए अलग-अलग ट्रस आते हैं| सुबह पलंग से उठने से पहले ट्रस को पहनें और उसके पश्चात ही चलें-फिरें| कुछ लोग ट्रस की जगह लंगोट भी बांधते हैं|

हाइएटस हर्निया (Hiatus hernia)

हाइएटस हर्निया क्या है? (Hiatus hernia kya hota hai?)

हायटस हर्निया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें डायाफ्राम (diaphragm) में उपस्थित छेद सामान्य से अधिक चौड़ा हो जाता है।

डायाफ्राम एक क्षैतिज मांसपेशी है, जो पेट की कैविटी को छाती की कैविटी से अलग करती है। इसमें एक छेद होता है, जिसके माध्यम से भोजन की नली (oesophagus) गुजरती है। लेकिन हायटस हर्निया के रोगियों में यह छेद सामान्य से अधिक चौड़ा हो जाता है।

इस वजह से पेट का शीर्ष भाग छाती की कैविटी में प्रवेश कर जाता है। नीचे गए गए x-ray में आप पेट के ऊपरी भाग को छाती में घुसा हुआ देख सकते हैं|

x-ray of hiatus hernia

हेटस हर्निया के लक्षण (Hiatus hernia ke lakshan)

कई बार इसके लक्षण पता भी नहीं लगते| बहुत लोगों को हाइएटस हर्निया होता है और उन्हें पता भी नहीं चलता| पर अगर लक्षण दीखते हैं तो वे किस प्रकार से प्रतिलक्षित होंगे?

  • इसके रोगियों को आम तौर पर अपच होती है और सीने के नीचे थोड़ी जलन महसूस होती है|

  • कुछ लोगों का जी मचलाता है और पेट थोड़ा फुला हुआ महसूस होता है|

हेटस हर्निया का उपचार (Hiatus hernia ka upchar)

क्योंकि यह एक यांत्रिक समस्या है, जहां डायाफ्राम का छेद बड़ा हो जाता है, इसलिए ऐसी कोई दवा नहीं है जिसका उपयोग करके आप छेद छोटा कर लेंगे|

किसको क्या उपचार देना है, ये इस बात पर निर्भर करेगा की रोगी में किस प्रकार के लक्षण हैं|

आमतौर पर अगर सामान्य प्रकार के लक्षण पाए जाते हैं, जैसे की मामूली सी जलन, तो इसका इलाज हमारी आहार की आदतों और जीवनशैली में बदलाव लाकर किया जा सकता है| जैसे कि, बहुत देर रात खाना ना खाएं इत्यादि|

यदि ये काम नहीं करता है, तो आपको किसी डॉक्टर को दिखाना चाहिए| वो दवाइयों से या सर्जरी के द्वारा इसको ठीक करेंगे|

सामान्यतः दो प्रकार के ऑपरेशन हेटस हर्निया को ठीक करने के लिए किये जाते हैं:

  • Standard anti-reflux operation (Nissen fundoplication)
  • LINX implant operation

पर जैसा की हमने पहले कहा, यदि आपको हेटस हर्निया है, पर कोई लक्षण नहीं है, तो आपको इसे ठीक कराने के लिए किसी ऑपरेशन की जरूरत नहीं है। आप जीवनशैली में बदलाव करके और कुछ दवाएं लेकर स्तिथि को संभाल सकते हैं|

पर वो रोगी जो आजीवन दवाएं नहीं लेना चाहते हैं, या उन्हें ज़्यादा दिक्कत है, वो निश्चित रूप से सर्जरी करवा सकते हैं|

यदि किसी मरीज को बार-बार एसिड रिफ्लक्स और जलन हो रही है, तो यह आपकी खाने की नली को नुक्सान पंहुचा सकता है| इससे सूजन हो सकती है, जिसे oesophagitis के रूप में जाना जाता है, और इसमें काफी दर्द होता है। खाने की नली की दीवार को ज्यादा नुक्सान पहुंचने पर कैंसर होने की सम्भावना भी बढ़ जाती हैं| इसलिए एसिड रिफ्लक्स और जलन को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और इसका इलाज किया जाना चाहिए।

हेटस हर्निया का देसी इलाज़ (Hiatus hernia ka desi ilaj)

हेटस हर्निया के लिए अविपत्तिकर चूर्ण (Avipattikar Churna), मुक्ता शुक्ति भस्म (Mukta Shukti Bhasma), मोती पिष्टी (moti pishti), कामदुधा रस (Kamdudha Ras) को मिलाकर खाना लाभप्रद बताया गया है| इस मिश्रण को सुबह-शाम, यानी दिन में दो बार 2-3 ग्राम लेना चाहिए|

और अधिक जानकारी के लिए किसी अच्छे आयुर्वेदिक वैद्य से संपर्क करें|

हेटस हर्निया में सावधानियाँ (Hiatus hernia mein savdhaniyan)

कब्ज के अलावा जो भी इनगुनल हर्निया में सावधानियाँ थीं, वो आपको यहाँ भी बरतनी होंगीं| इसके अलावा आपको सोते हुए अपने धड़ (शरीर के ऊपरी भाग) को थोड़ा ऊपर रखना होगा, ताकि पेट का एसिड मुँह में ना आ पाए| एसिड रिफ्लक्स में अक्सर ऐसा हो जाता है|

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