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जलने का घरेलु इलाज (Jalne ka gharelu ilaj)

अगर आपके शरीर का कोई हिस्सा आग से या गर्म चाय/तेल इत्यादि से हलके से जल गया है (पर बुरी तरह का, या गहरा घाव नहीं है), तो तुरंत यह उपाय करें:

  • जले भाग को तुरंत ताज़े और साफ़ पानी में पूरी तरह से डूबा दें (बोहत ठंडे पानी में नहीं), या बहते पानी के नीचे रख दें|
  • अगर बोहत गहरा जला है, या बुरी तरह से, तो घाव पर साफ़ कपडा रखकर तुरंत अस्पताल जाएं|

इतना करने के बाद आप आगे का लेख पढ़ सकते हैं|

ऊपर दिया गया इलाज अकस्मात् जलने पर आप तुरंत कर सकते हैं| आपदा की स्तिथि में किसी के पास पूरा लेख पढ़ने का मौका नहीं होता, इसलिए हमने इसे सबसे पहले लिख दिया| अगर आपको बहुत जल्दी नहीं है, तो आप बाकी का लेख पढ़ सकते हैं|

(इस लेख में हम जानेंगे - Home remedies for light burn, in Hindi)

Table of Contents (in Hindi)
  • जलने से हुई हानि की गंभीरता
  • हलके जलने पर क्या करें
  • जलने पर क्या सावधानियाँ बरतें ?

जलने के तुरंत बाद आप क्या करते हैं यह बहुत महत्वपूर्ण होता है, ख़ासतौर से शुरुआत के दस-पंद्रह मिनट| इसलिए आपको यह जानकारी पहले से होनी चाहिए कि जलने पर क्या करना है|

हम लोगों में से शायद ही कोई हो जो कभी जला न हो| यह दुर्घटना अलग-अलग चीज़ों से हो सकती है, जैसे की आग, गर्म द्रव्य (चाय, दूध, तेल इत्यादि), भाँप, गर्म धातु (गर्म तवा, बाइक का साइलेंसर इत्यादि)| आप किस चीज़ से जलें हैं, उसके अनुसार आपका इलाज थोड़ा भिन्न-भिन्न हो सकता है|

जलने से हुई हानि की गंभीरता

जलने के कई प्रकार हो सकते हैं| अतः, सबसे पहले यह जानना जरूरी है कोई कितनी गंभीर रूप से जला है|

  • फर्स्ट डिग्री बर्न - सबसे सामान्य और हलके प्रकार का जलना, जिसमें हमारी ऊपरी त्वचा (Epidermis) जल जाती है|
  • सेकंड डिग्री बर्न - इसमें हमारी त्वचा की निचली दूसरी परत (Dermis) जल जाती है|
  • थर्ड डिग्री बर्न - नुक्सान त्वचा की निचली दूसरी परत से भी पार चला जाता है|
  • फोर्थ डिग्री बर्न - हमारी माँसपेशियाँ और हड्डियां भी जल जाती हैं| ऐसा ज्यादातर बिजली से जलने पर ही होता है|
चेतावनी

थर्ड डिग्री और फोर्थ डिग्री जलने पर आपको अस्पताल जाना ही पड़ता है| यह गंभीर होता है|

हलके जलने पर क्या करें (halka jalne par kya karein?)

अगर आप हलके जले हैं (फर्स्ट डिग्री या सेकंड डिग्री), तो आप आसानी से इसे घर पर ही संभाल सकते हैं| अर्थार्थ अगर आपका जला हुआ छेत्र 2 इंच से ज्यादा चौड़ा नहीं है, या ज्यादा गहरा नहीं है|

  • जलने पर तुरंत इलाज करें, चाहे यह कितना छोटा ही क्यों न हो| ज्यादातर नुकसान देरी करने से, और जलने के बाद होने वाले संक्रमण (infection) से होता है|
  • जले हुए भाग को तुरंत पानी में डुबो दें - यह पानी थोड़ा ठंडा हो पर बहुत नहीं| बर्फीला पानी ना लें| यह काम तुरंत कर लें - जलने के एक-दो मिनट के अंदर ही| इस्तेमाल किया जाने वाला पानी स्वच्छ होना चाहिए| हो सके तो पीने वाला पानी प्रयोग में लाएं|
  • जब तक जलन पूरी तरह ख़तम न हो जाये, जले हुए भाग को पानी से बाहर न निकालें| अगर पानी से बाहर निकलते ही थोड़ी सी भी जलन होती है, तो वापस पानी में डाल दें| ऐसा करने से जलने के निशान भी नहीं पड़ते हैं|
चेतावनी

पानी का इस्तेमाल केवल फर्स्ट डिग्री और सेकंड डिग्री जलने पर ही करें, यानी हलके जलने पर| ज्यादा गहरे जलने पर पानी ना इस्तेमाल करें, क्यूंकि इससे संक्रमण हो सकता है|

  • जब जलन करीब-करीब पूरी तरह ख़त्म हो जाये, तो आप उस भाग पर कोई लेप लगा सकते हैं, जैसे की एलोवेरा जैल (Aloe Vera Gel)| इससे आपकी जलन और भी कम हो जाएगी| नारियल के तेल में कपूर मिलाकर भी आप जले हुए हिस्से पर लगा सकते हैं| इसके अलावा जलन कम करने के लिए आप आलू के हिस्सों, हल्दी के पानी आदि का भी इस्तेमाल कर सकते हैं| पर वैसे, जलन का सबसे अच्छा इलाज पानी है है, और यह फ़फ़ोले और निशान भी पड़ने नहीं देता| फ़फ़ोले तभी पड़ते हैं जब आप थोड़ी देर बाद ही पानी से जला हुआ हिस्सा निकाल लेते हैं| जब तक जलन पूरी तरह ख़तम न हो जाये, पानी से बाहर न निकलें|
नोट

एक बार मेरी 3 साल की बहन खोलते हुए दूध में गिर गयी थी, तो मेरे पिताजी ने उसे तुरंत पूरा गर्दन तक पानी के टब में डाल दिया| आधे-एक घंटे बाद जब उसकी जलन पूरी तरह ख़तम हो गयी, तभी उसे बाहर निकाला - न फफोले पड़े, न कोई निशान बना|

  • अब आगे इस हिस्से पर कोई चोट या रगड़ न लगे, इसके लिए किसी साफ़ कपडे से पट्टी बाँध लें|
चेतावनी

अगर दर्द और सूजन ज्यादा है, या मरीज़ बहुत गहरा या ज्यादा जल गया है (थर्ड डिग्री या फोर्थ डिग्री), तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें| हो सकता है उनको दर्द-निवारक गोलियों की आवश्यकता पड़े, या सर्जरी की भी| विशेषज्ञों के अनुसार, जले हुए भाग को कपडे से ढक दें| अस्पताल ले जाते वक़्त आपको मरीज़ के जले हुए हिस्से को उसके दिल के स्तर से ऊपर रखना चाहिए|

जलने पर क्या सावधानियाँ बरतें ? (jalne par savdhaniyan)

  • जलने पर कभी भी बोहत ठन्डे पानी या बर्फ का इस्तेमाल न करें|
  • जले हिस्से को छुएं न| हाथों में कई जीवाणु होते हैं, जो संक्रमण कर सकते हैं|
  • जले हुए हिस्से पर मख़्खन, घी इत्यादि चिकना प्रदार्थ न लगाएं| इससे उस घाव के इलाज में बाद में और भी दिक्कत आती है| इससे संक्रमण भी हो सकता है|

जलने के कुछ दिनों बाद तक आपको कुछ सावधानियाँ बरतनी पड़ेंगीं, जैसे की :

  • जलने के बाद टिटनस (tetanus) का टीका जरूर लगवा लें, चाहे आप बहुत ज्यादा न जलें हों| हमारी त्वचा हमें बहुत से बैक्टीरिया से बचाती है| त्वचा के किसी हिस्से के जलने पर हमारे इस सुरक्षा कवच में सेंध लग जाता है|
  • जलने के कुछ समय बाद अगर खाल की पिलपिली परत बन जाती है, या फफोला हो जाता है, या थोड़ा कपडा चिपका रह जाता है, तो उससे हटाएं नहीं| इससे घाव बढ़ सकता है और हवा सीधा घाव पर लगने से संक्रमण भी हो सकता है|
  • अगर खाने की नली के पास गहरा जला है (अर्थार्थ थर्ड या फोर्थ डिग्री बर्न, गले या छाती के आसपास), तो मरीज़ को मुँह से कुछ खाने को न दें, न ही उसके सर के नीचे तकिया लगाएं|
जलने का निशान

अगर आप पहले कभी जले थे, और उसके निशान अभी भी आपकी त्वचा पर रह गए हैं, तो यह आसानी से जाते नहीं हैं| परन्तु, राजीव दीक्षित जी के अनुसार सुबह आपके मुँह में आयी लार को जले हुए निशान पर कुछ महीने लगाने से यह दाग पूरी तरह चले जाते हैं| पर लार अपनी होनी चाहिए, वह भी सुबह-सुबह की|

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