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सायटिका का इलाज कैसे करें? (Sciatica ka ilaj kaise karein?)

क्या आपको अचानक से बैठने और चलने में दिक्कत होने लगी है? ऐसा लगता है जैसे कमर के निचले हिस्से या कूल्हों और जांघो में बैठने और चलने से दर्द उत्पन्न होता है, ऐसा लगता है जैसे कोई पिन चुभा रहा है?

अगर ऐसा है तो ये सायटिका हो सकता है| सायटिका को हिंदी में कटिस्नायुशूल कहा जाता है|

Table of Contents (in Hindi)
  • सायटिका क्या होता है ?
  • सायटिक तंत्रिका क्या है ?
  • सायटिका के लक्षण क्या हैं ?
  • सायटिका होने के क्या कारण हैं ?
  • सायटिका का दर्द कितने समय तक रहता है?
  • सायटिका के उपचार

सायटिका क्या होता है ? (Sciatica kya hota hai?)

सायटिका एक प्रकार का दर्द है, जो सायटिक तंत्रिका में जलन या सूजन की वजह से उत्पन्न होता है। वैसे सायटिका एक सामान्य शब्द है जो हर उस दर्द के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो कमर के निचले हिस्से से, कूल्हों से होते हुए पैरों में जाता है|

सायटिक तंत्रिका क्या है? (Sciatica nas kya hai?)

सायटिक मानव शरीर में सबसे लंबी तंत्रिका है| ये तंत्रिका रीढ़ की हड्डी से होती हुई नितंबों से गुजरती हुई, दोनों पैरों में जाती है और घुटनों के ठीक नीचे समाप्त होती है।

सायटिका के लक्षण क्या हैं? (Sciatica ke lakshan kya hein?)

सायटिका का दर्द रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से से उत्पन्न होता है|

सायटिका के सामान्य लक्षण निम्नलिखित हैं:

  • पीठ के निचले हिस्से, नितम्ब के एक तरफ और किसी एक पैर में दर्द|
  • साथ ही साथ पैरों में झनझनाहट और सुन्नपन भी होता है। जिस पैर में सायटिका का दर्द होता है उसमें कमजोरी भी महसूस होती है|
  • इसमें पैर या कूल्हों में जलन का एहसास होता है|
  • सायटिका दर्द के मामलों में बैठने से मरीज का दर्द और भी बढ़ता है|

सामान्यतः यह दर्द, झनझनाहट और सुन्नपन किसी एक पैर की तरफ ही होता है, दोनों पैरों में नहीं| पर कुछ दुर्लभ मामलों में ये शरीर के दोनों तरफ भी होता हुआ पाया गया है|

सायटिका की पहचान करने के लिए, डॉक्टर आपसे ये सब करवा सकते हैं:

  • अपने पैर की उंगलियों या एड़ी पर चलना
  • स्क्वैटिंग करना (बैठने की स्थिति से उठना)
  • अपनी पीठ के बल लेटते हुए अपने पैरों को एक-एक करके उठाना

सायटिका से होने वाले दर्द आमतौर पर इन गतिविधियों से और भी बढ़ जाते हैं।

डॉक्टर इसको और अच्छे से डायग्नोज़ करने के लिए अक्सर X-ray, CT Scan, MRI अथवा नर्व कंडक्शन / स्टिमुलेशन स्टडीज करवाते हैं| किसी भी हर्नियेटेड डिस्क या हड्डी के बढ़ाव (स्पर्स) एक्स-रे और अन्य इमेजिंग परीक्षणों से दिखाई दे जाते हैं। लेकिन डॉक्टर आमतौर पर इन परीक्षणों को नहीं करवाते हैं, जब तक कि आपका दर्द बहुत अधिक गंभीर न हो।

सायटिका होने के क्या कारण हैं ? (Sciatica hone ke kya kaaran hein?)

सायटिका आमतौर पर निचली रीढ़ में किसी नस (ज्यादातर सायटिक तंत्रिका) के दबने के कारण होता है। यह कई वजह से हो सकता है|

  • स्लिप डिस्क (slip disc) सायटिका होने का सबसे सामान्य कारण है|
  • यह लम्बार/स्पाइनल कैनाल स्टेनोसिस (spinal stenosis) के कारण भी हो सकता है| यानि, आम भाषा में बोलें तो, आपकी रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से की नलिका संकुचित हो जाती है|
  • यह आपकी रीढ़ की हड्डी में किसी हड्डी में अतिवृद्धि के कारण हो सकता है।
  • यह दर्द degenerative disc disease के कारण भी हो सकता है|
  • रीढ़ की हड्डी में कोई चोट लगने पर भी ये दर्द हो सकता है|
  • कभी-कभी ये रीढ़ की हड्डी के पास हुए किसी ट्यूमर की वजह से कोई नस दबने से भी हो जाता है|
  • मधुमेह जैसी बीमारी से तंत्रिका क्षतिग्रस्त होने से ये दर्द हो सकता है।
  • यह गर्भावस्था और मोटापे के कारण भी हो सकता है| पर यह गर्भावस्था और मोटापा ख़त्म होने पर खुद सही भी हो जाता है|
  • ये ख़राब जीवनशैली की वजह से भी होता है, जैसे की ऊंची एड़ियों की सैंडल पहनने से, बहुत अधिक मुलायम गद्दे पर सोने से, आदि|
  • इसके होने की सम्भावना और भी बढ़ जाती है जब आप किसी ऐसी नौकरी में हों, जिसमें आपको अपनी पीठ मोड़नी पड़ती हो, भारी बोझ उठाना पड़ता हो या लंबे समय तक ड्राइविंग करनी पड़ती हो। लंबे समय तक बैठे रहने वाले व्यक्ति, सक्रिय लोगों की तुलना में सायटिका विकसित करने की अधिक संभावना रखते हैं।

सायटिका का दर्द कितने समय तक रहता है? (Sciatica ka dard kitne samay tak rehta hai?)

सायटिका के अधिकांश मामले चार से छह सप्ताह में स्वतः ही ठीक हो जाते हैं, वो भी बिना कोई दीर्घकालिक नुक़सान पहुँचाये हुए, भले ही कोई इलाज न किया गया हो। बेशक यदि आप कुछ उचित व्यायाम करते हैं और अपनी बैठने और लेटने की मुद्रा में सुधार करते हैं, तो आप और भी तेजी से सुधार कर सकते हैं।

हालांकि, अधिक गंभीर मामलों में मरीज को ठीक होने में अधिक लंबा समय लग सकता है।

चेतावनी

यदि सायटिका का दर्द एक महीने से अधिक समय तक रहता है, दर्द बहुत अधिक है, या लक्षण असामान्य हैं, तो किसी चिकित्सक को तुरंत संपर्क करें।

सायटिका के उपचार (Sciatica ka ilaj)

सायटिका के उपचार के कई प्राकर्तिक विकल्प मौज़ूद हैं, जैसे की व्यायाम, फिजियोथेरेपी, मालिश, संतुलित पौष्टिक आहार इत्यादि| केवल आराम करने से भी इस दर्द में काफी राहत मिलती है। आईये सायटिका के इलाज के इन तरीकों को कुछ और विस्तार से जानें|

बिस्तर पर आराम (bistar par aaraam)

आमतौर मामलों में ये देखा गया है कि, तीन से चार दिन बिस्तर पर आराम करने से ये दर्द ठीक हो जाता है| परन्तु आपको किसी फर्म/दृढ़ गद्दे या फर्श पर ही लेटना चाहिए। यह महत्वपूर्ण है|

सिकाई (sikai)

गर्म या ठंडे पैक से सिकाई करने से दर्द कम होता है और मरीज़ को आराम मिलता है। मरीज़ को अपनी पीठ के निचले हिस्से पर कई मिनट के लिए सिकाई करनी चाहिए, दिन में कई बार। पहले कुछ दिन आप ठंडी सिकाई कर सकते हैं और बाद में गर्म सिकाई| ठंडी सिकाई के लिए बर्फ पैक या ठन्डे मटर के पैक को किसी साफ तौलिये में लपेट कर उपयोग करें। किसी गिलास या रबर की बोतल में गर्म पानी भरकर आप गर्म सिकाई कर सकते हैं|

ध्यान रहे की अगर आप गिलास की बोतल इस्तेमाल करते हैं तो वो आपको ज्यादा गर्म सिकाई देगी| मेरी माँ को जब ये दर्द हुआ था, तो वो गिलास बोतल से ही सिकाई करती थीं, क्यूंकि उन्हें रबर बोतल उतनी गर्म नहीं लगती थी| पर मेरे हिसाब से रबर बोतल से सिकाई करना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है|

मालिश (maalish)

सायटिका में मालिश दो तरीकों से मदद कर सकती है:

  • जब आपकी मांसपेशियां तनावग्रस्त होती हैं, तो वे आपकी नसों पर अधिक दबाव डाल सकती हैं, जिसमें आपकी sciatic तंत्रिका भी शामिल है। इन तनावपूर्ण मांसपेशियों की मालिश करने से आपकी sciatic तंत्रिका पर दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

  • मालिश करने से एंडोर्फिन निकलता है। एंडोर्फिन दर्द से राहत देता है।

आप कई तरह की मालिश प्रयोग में ला सकते हैं, जैसे की गहरी ऊतक मालिश (Deep tissue massage), स्वीडिश मालिश (Swedish massage), इत्यादि|

आयुर्वेद के अनुसार ये दर्द वाद दोष के कारण होता है| अगर आपको ज्यादा गैस बनती है और पेट साफ़ नहीं रहता तो इसके होने की सम्भावना अधिक रहती है| और हमें पता है की तेल मालिश करने से वाद दोष का निवारण होता है| इसलिए तेल मालिश करना इस दर्द के लिए हर तरह से लाभकारी है|

व्यायाम (vyayaam)

केवल चलने या हल्की स्ट्रेचिंग जैसे व्यायाम से भी सायटिका सही हो जाता है। जब आप चलते हैं तो सूजन में सुधार हो सकता है, इसलिए थोड़ा सा चलना एक अच्छा उपचार साबित हो सकता है।

आप किसी एक्सपर्ट या डॉक्टर के बताये अनुसार स्ट्रेच व्यायाम भी कर सकते हैं| पर स्ट्रेच के दौरान झटकों से, उछलने से या शरीर को ज्यादा मोड़ने से बचें और स्ट्रेच करते हुए कम से कम 30 सेकंड के लिए किसी एक अवस्था में रहें।

आहार

डॉक्टर इस बीमारी में कैल्शियम खाने की सलाह देते हैं| साइटिका के मरीज़ों को खटाई से परहेज़ करना चाहिए|

वैकल्पिक उपचार (vaikalpic upchaar)

बहुत से लोग मानते हैं कि सायटिका के उपचार के लिए योग, मालिश, बायोफीडबैक और एक्यूपंक्चर जैसे वैकल्पिक उपचार काफी मदद करते हैं।

अगर आप योग के माध्यम से इसका उपचार करना चाहते हैं, तो निम्नलिखित आसान कर सकते हैं:
बालासन, अर्ध चंद्रासन, भुजंगासन, पवनमुक्तासन, कपोतासन, सेतुबंधासन, विपरीत करनी, अर्ध मत्स्येन्द्रासन|

व्यायाम या योग करते हुए अपने शरीर की सुनें और अपने आप को किसी भी असहज स्थिति में ना धकेलें।

उपसंहार

आपके लिए सबसे अच्छा काम कौन सा उपचार करता है, यह देखने के लिए आप थोड़ा बहुत प्रयोग कर सकते हैं। परन्तु अगर किसी भी चीज़ को करने से दर्द होता है, तो उस व्यायाम या मुद्रा से बचें।

सायटिका के मरीजों को डॉक्टर ज्यादातर सिर्फ दर्द-निवारक दवाएं (pain-killers) देते हैं| सायटिका के अधिक गंभीर मामलों में और भी तरीके आजमाए जा सकते हैं, जैसे की एपिड्यूरल स्टेरॉयड इंजेक्शन, ट्रिगर पॉइंट इंजेक्शन, बायोफीडबैक और रीढ़ की हड्डी को स्टिमुलेट करना। बहुत ही विरले मामलों में सर्जरी भी की जाती है| सर्जन हड्डी के बढे हिस्से या हर्नियेटेड डिस्क के उस हिस्से को हटा सकते हैं जो कि तंत्रिका पर दबाव डाल रहा है| पर ये तरीके इस लेख के विषय छेत्र से बाहर हैं| अगर तकलीफ ज्यादा है, या ज्यादा समय तक रहती है तो किसी वैद्य या डॉक्टर से संपर्क अवश्य करें|

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